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Mar 30, 2014

प्रश्न मंजुषा- 8

1. भारतीय संविधानात कितवी घटना दुरुस्ती करून सार्वजनिक नोकऱ्यामध्ये आरक्षणाची तरतूद करण्यात आली आहे?

A. 77 वी
B. 117 वी
C. 118 वी
D. 98 वी



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2. सद्या महाराष्ट्राचे मुख्य निवडणूक अधिकारी कोण आहे?

A. व्ही. एस. संपत
B. नीला सत्यनारायण
C. नितीन गद्रे
D. रत्नाकर गायकवाड



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3. 12 वे विद्राहो साहित्य संमेलन नुकतेच कोठे पार पडले?

A. सासवड
B. शेगाव
C. गोंदिया
D. परभणी



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4. फेब्रुवारी मध्ये घोषित झालेल्या FIFA या संस्थेच्या फुटबॉल क्रमवारीत भारताचा जगात कितवा क्रमांक होता?

A. 134
B. 143
C. 154
D. 158



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5. Directorate of Advertising and Visual Publicity च्या महासंचालकपदी कुणाची निवड करण्यात आली आहे?

A. शोभा डे
B. प्रसून जोशी
C. अमित अग्रवाल
D. के. गणेश



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Mar 26, 2014

प्रश्न मंजुषा- 7

1. देशात सामुदायीक कॉलेज ची स्थापना करण्यासंदर्भात कोणती समिती स्थापन करण्यात आली आहे?

A. कुमार भागवत समिती
B. अर्चना चिटणीस समिती
C. विक्रम फडणवीस समिती
D. आर.के. शर्मा समिती



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2. अनाथ मुलींचे पुनर्वसन करण्यासाठी केंद्र सरकारतर्फे राबविली जाणारी योजना.

A. चैतन्या योजना
B. उज्ज्वला योजना
C. सुकन्या योजना
D. लाडली लेक योजना



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3. भारतीय घटना समितीचे उपाध्यक्ष कोण होते?

A. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
B. सरदार वल्लभभाई पटेल
C. लिकायत अली खान
D. एच. सी. मुखर्जी



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4. भारताची पहिली महिला मुख्यमंत्री कोण?

A. सरोजिनी नायडू
B. विजयालक्ष्मी पंडित
C. प्रतिभाताई पाटील
D. सुचेता कृपलानी



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5. देशातील अभिमत विद्यापीठाची पाहणी करण्याकरिता केंद्र सरकारने कोणती समिती नेमली होती?

A. जाधव समिती
B. जालान समिती
C. वर्मा समिती
D. टंडन समिती.



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Mar 25, 2014

प्रश्न मंजुषा- 6

1. तत्कालीन नौदल प्रमुख D.K. जोशी यांनी नौदल प्रमुखपदावरून राजीनामा दिल्यानंतर काही काळासाठी हंगामी नौदल प्रमुख म्हणून कुणाची नियुक्ती करण्यात आली हिती?

A. R.K. धवन
B. नीलमकुमार बिस्वास
C. मोहित उपाध्याय
D. C.K. सिंग



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2. G-20 देशात प्राप्तीकर भरणाऱ्यांच्या यादीत भारताचा कितवा क्रमांक लागतो?

A. पाहिला
B. दुसरा
C. तिसरा
D. चौथा



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3. नुकतीच कुणाची CRPF च्या ब्रांड अंबेसडर पदी नियुक्ती झाली आहे?

A. मेरी कोम
B. ज्वाला गुट्टा
C. सायना नेहवाल
D. कोनेरू हम्पी



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4. Gold Standard Foundation तर्फे उर्जेचा प्रभावी वापर केल्याबद्दल गौरविण्यात आलेला जगभरातील पहिला रेल्वे प्रकल्प कोणता?

A. मुंबई लोकल
B. मुंबई मोनोरेल
C. दिल्ली मेट्रो
D. कोकण रेल्वे



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5. 'वाळवंट विकास कार्यक्रम कोणत्या वर्षीचा आहे?

A. 1974
B. 1975
C.1976
D. 1977



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Mar 24, 2014

प्रश्न मंजुषा- 5

1. 1907 चे कॉंग्रेस चे सुरत अभिवेषण अगोदर कोठे होणार होते?

A. नागपूर
B. पुणे
C. वाराणसी
D. अलाहाबाद



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2. आसाम राज्यात पंचायत समितीला काय म्हणतात?

A. गण परिषद
B. आचालिक परिषद
C. आचालिक पंचायत
D. नगर पंचायत



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3. महाराष्ट्र वीज नियामक आयोगाच्या अध्यक्षपदी कुणाची निवड झाली आहे?

A. चित्रा देशमुख
B. चंदा अय्यंगार
C. सुचित्रा सेन
D.अनु आगा



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4. देशातील पहिल्या 'डाक घर बचत बँकेचे' ATM कुठे सुरु करण्यात आले आहे?

A. नागपूर
B. कोलकाता
C. पटना
D. चेन्नई



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5. The Associated Chamber of Commerce and Industry या संस्थेतर्फे दिला जाणारा Excellence in Education हा पुरस्कार कुणत्या शिक्षण संस्थेला प्राप्त झाला आहे?

A. उस्मानिया विश्वविद्यालय
B. महात्मा गांधी आंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय
C. सिक्कीम मणिपाल विश्वविद्यालय
D. दिल्ली विश्वविद्यालय



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Mar 18, 2014

प्रश्न मंजुषा- 4

1. भारतीय लष्कराच्या 'लष्करी अभियान महासंचालक' पदी नुकतीच कोणाची निवड झाली आहे?

A. सौमित्र घोष
B. टी. के. शर्मा
C. राजदीप सिंग राणा
D. पी. आर. कुमार



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2. 100% महागाई भत्ता केव्हा पासून केंद्रीय कर्मचाऱ्यांना लागू करण्याचा निर्णय केंद्रसरकारने घेतला आहे?

A. 1 जानेवारी 2014
B. 1 एप्रिल 2014
C. 1 डिसेंबर 2013
D. 1 मे 2014



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3. महाराष्ट्रातील कोणत्या जिल्ह्यात 'सारस' ह्या दुर्मिळ पक्षाची संख्या सर्वाधिक आहे?

A. चंद्रपूर
B. गोंदिया
C. यवतमाळ
D. गडचिरोली



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4. खालील पैकी कोणत्या देशातून विषुववृत्त आणी मकरवृत्त जातो?

A. अमेरिका
B. नायजेरिया
C. ब्राझील
D. आर्जेन्टिना



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5. ब्रिटन 'स्कॉटलंडला' केव्हा स्वतंत्र देणार आहे?

A. डिसेंबर 2014
B. 2015
C. 2016
D. या पैकी नाही



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Mar 14, 2014

'ई-ऑफीस' मुळे महाराष्ट्रातील ऑफिस होणार 'पेपरलेस ऑफिस'.

'पेपरलेस ऑफीस' ही संकल्पना संभ्रमित करणारी होती. परंतू राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्राने विकसित केलेल्या 'ई-ऑफीस' या संगणक प्रणालीमुळे कार्यालयास पेपरमुक्त होण्याची ग्वाही मिळाली आहे.

सरकारी कामकाजात कागद आणि संचिका (फाईलचे) अनन्यसाधारण महत्व आहे. परंपरागत पद्धतीने सरकारी यंत्रणेत सर्व माहिती लेखी स्वरूपात जतन केली जाते. प्रशासनात विविध ई-गव्हर्नन्स प्रकल्पांची अंमलबजावणी होऊनसुद्धा लेखी स्वरूपातील माहितीचे तेवढेच महत्व आहे. शासनाच्या विविध विभागात संगणक प्रणालीचा वापर होऊनसुद्धा अनेक जुन्या-नव्या संचिका कागदाच्या स्वरूपात जतन करण्यात येतात. नैसर्गिक कारणाने जुन्या महत्वाच्या संचिका जीर्ण होत असल्याने त्यांचे जतन करणे कठीण काम होत आहे, तसेच अपघाताने अभिलेख कक्षातील संचिका नष्ट झाल्यास त्या परत मिळवणे अशक्य काम आहे. या व्यतिरिक्त चालू प्रकरणांच्या बाबतीत परंपरागत पद्धतीत त्या संचिका एका पेक्षा जास्त डेस्कवरून प्रवास करत असतात. प्रत्येकवेळी संचिका सादर करतांना/ पुढे पाठवतांना विविध कर्मचारी आणि अधिकारी यांच्याकडून प्रत्येक संचिका प्रत्यक्ष हाताळली जाते आणि त्याचा खऱ्याअर्थाने प्रवास होतो. या प्रवासात विविध टप्प्यावर संचिका गहाळ होण्याचा संभव असतो तसेच एका टप्प्यावरून दुसऱ्या टप्प्यावर जाताना (कार्यालयाअंतर्गत आणि कार्यालयाबाहेर) वेळ लागतो. बाहेर जाणाऱ्या आणि कार्यालयात येणाऱ्या संचिकांचा ताळमेळ बसवणे किचकट काम असते. प्रशासनात ई-मेल आणि स्कॅनिंग अशा इलेक्ट्रॉनिक्स माध्यमांचा वापर करून कागदाला पर्यायी व्यवस्था निर्माण झाली तरीही प्रत्यक्ष एखाद्या प्रस्तावाला मंजुरी देताना किंवा एखाद्या प्रमाणपत्रावर सही करतांना मात्र कागदाशिवाय पर्याय नसतो. 

अशा परिस्थितीत 'पेपरलेस ऑफीस' ही संकल्पना केवळ संभ्रमित करणारी होती. परंतू राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्राने विकसित केलेल्या 'ई-ऑफीस' या संगणक प्रणालीमुळे कार्यालयास पेपरमुक्त होण्याची ग्वाही मिळाली आहे. या प्रणालीच्या वापरात कोणतीही कागदी संचिका तयार होत नाही तसेच प्रत्येक संचिकेचा प्रवास डिजिटल यंत्रणेच्या माध्यमातूनच होतो. किंबहुना या प्रणालीतून तयार होणाऱ्या संचिका, विविध प्रमाणपत्रे, दाखले आणि परवाने स्वाक्षरीत करण्यासाठी डिजीटल सिग्नेचरचा वापर करण्यात येतो. ज्या विभागात जुन्या संचिका असतील त्या स्कॅन करून याप्रणालीत जोडता येतात. ई-ऑफीस ह्या वेब-बेस्ड प्रणालीतील सर्व डाटा राष्ट्रीय डाटा सेंटर (एनडीसी) वर प्रस्थापित केला असून ह्या प्रणालीने सायबर सुरक्षा परीक्षण (सायबर सेक्युरीटी ऑडीट) पूर्ण केले आहे. तसेच GIGW आणि WCAG 2.0 या दोन्ही तांत्रिक पात्रता पूर्ण केल्या आहेत.

'ई-ऑफीस' या प्रणालीत एखाद्या कार्यालयाच्या कार्यपद्धतीस अनुसरून सात भिन्न प्रणाली विकसित केल्या आहेत. ई-फाईल या प्रणालीत परंपरागत संचिकांची कार्यपद्धती ईलेक्ट्रॉनिक माध्यमातून करण्यासाठी तर 'केएमएस' या प्रणालीद्वारे विविध शासन निर्णय, धोरणे, फॉर्मस्, अधिनियम व नियम परिपत्रके, मार्गदर्शक तत्त्वे आणि मानदंड अशा माहितीचे एकत्रीकरण, साठवण आणि शोधण्यासाठी अद्ययावत तंत्रज्ञान वापरण्यात आलेले आहे. विविध विभागांना आपसात माहिती आणि संदेश देवाण-घेवाण करण्यासाठी सीएएमएस (Collaboration and Messaging Services) प्रणाली विकसित केलीय तर 'ई-लीव' आणि 'ई-टूर' या प्रणालीत रजा आणि दौऱ्याबाबतीत सर्व प्रशासकीय बाबी संगणकीकृत करण्यात आलेल्या आहेत. पीआयएमएस (Personnel Information Management System) प्रणालीत सेवापुस्तिकांच्या संदर्भातील सर्व प्रशासकीय बाबींची नोंद ठेवण्यात आली आहे. 

महाराष्ट्र शासनाने सर्व सरकारी कार्यालयांना 'ई-ऑफीस' या प्रणालीचा वापर करणे बंधनकारक करण्याचा निर्णय घेतल्यानंतर राज्याचे अर्थ खाते, नियोजन विभाग, सामान्य प्रशासन विभागासह शासनाच्या अनेक विभागांनी या प्रणालीची अंमलबजावणी केलेली असून मंत्रालयातील अनेक विभागांव्यतिरिक्त आयुक्त, राष्ट्रीय ग्रामीण आरोग्य अभियान, महाराष्ट्र राज्य यांचे कार्यालय आणि सिंधुदुर्ग जिल्हाधिकारी कर्यालयाने 'ई-ऑफीस' प्रणालीची प्रभावीपणे अंमलबजावणी केलेली आहे. 

'ई-ऑफीस' प्रणालीची अंमलबजावणी करण्यापूर्वी या कार्यालयात कार्यरत अधिकारी/ कर्मचारी यांच्या संख्येनुसार संगणक, स्कॅनर आणि प्रिंटर यांची पुर्तता करण्यात आल्यानंतर सर्व संगणकांची जोडणी लोकल एरीया नेटवर्क द्वारे करण्यात आली. सर्व संगणकावर निकनेट (NICNET) द्वारे इंटरनेट जोडणी करून सर्व अधिकारी/ कर्मचारी यांचे एनआयसी ई-मेल बनविण्यात आले तसेच सर्वांच्या डिजीटल सिग्नेचर प्राप्त करून घेण्यात आल्या. 'ई-ऑफीस' प्रकल्पासाठी ही पुर्व तयारी अत्यावश्यक आहे. त्याच बरोबर प्रत्येक कर्मचाऱ्याची संपुर्ण माहिती एम्प्लॉईज मास्टर डीटेल्स (ईएमडी) नमुन्यात या प्रणालीत नोंदविणे आवश्यक असते.

प्रत्येक विभागाच्या कार्यपद्धतीप्रमाणे त्या विभागातील सर्व कामासाठीच्या मानक कार्यकारी प्रक्रिया (SOP : standard operating procedure) स्पष्टपणे नमुद करून प्रत्येक विभागाची रचना आणि त्यात प्रत्येक कर्मचाऱ्याची जबाबदारी आणि कर्तव्य निश्चित करण्यात आली. विविध संचिका/ टिप्पणी/ पत्र यांचे नमुना मसुदे निश्चित करून प्रत्येक कर्मचाऱ्याचे कार्य विवरण नेमून देण्यात आले. त्याआधारे 'ई-फाईल' प्रणालीअंतर्गत आवक-जावक विभागापासून ते अभिलेख कक्षापर्यंत प्रत्येक टप्प्यावरील विविध कार्यपद्धती आणि मर्यादा स्पष्ट करून संचिकेचा मार्ग निश्चित करण्यात आला. त्या ठराविक मार्गानेच फाईल पुढे जाते आणि प्रत्येक टप्प्यावर त्या संचिकेची नोंद संगणक प्रणालीत होते. प्रत्येक संचिकेस विशिष्ट सांकेतांक दिल्याने त्यानुसार संचिकेचा शोध घेऊन सद्यस्थितीत ती संचिका कोणत्या डेस्क वा अधिकाऱ्याकडे आहे, तसेच त्याच्याकडे ती केव्हापासून प्रलंबित आहे, याचीही माहिती या प्रणालीतून उपलब्ध होते. 

या प्रणालीच्या पहिल्या टप्प्यात कार्यालयातील आवक शाखेत प्रत्यक्ष दाखल होणारा टपाल स्कॅन केला जातो व त्यानंतर सदर पत्राची नोंद या प्रणालीत केली जाते. या प्रणालीत नोंद करतांना संबंधित पत्राची स्कॅन केलेली फाईल त्या पत्राशी इलेक्ट्रॉनिकली जोडली जाऊन त्या पत्रास एक संगणकीकृत सांकेतांक (डायरी नंबर) दिल्या जातो. त्या कागदाचे भौतिक अस्तित्व या ठिकाणी संपते आणि तो इलेक्ट्रॉनिक स्वरूपात पुढे वाटचाल करतो. या विभागाला सेंट्रल रजिस्ट्रेशन युनिट (सीआरयु) असे संबोधण्यात येते. सीआरयु मध्ये नोंद झाल्यानंतर ते पत्र इलेक्ट्रॉनिक स्वरूपात संबंधित विभागाच्या नोंदणी कक्षात पाठवले जाते जेथे त्या विभागाच्या कार्यपद्धतीनुसार त्या पत्रावर कार्यवाही करण्यास संबंधित लिपिकाच्या डेस्ककडे पाठवले जाते त्यामुळे ते पत्र गहाळ गहाळ होण्याची शक्यता उरलेली नाही. 

विभागप्रमुखाकडून एखादे पत्र चिन्हांकीत करून शेऱ्यासह संबंधित लिपिकाकडे इलेक्ट्रॉनिक स्वरूपात प्राप्त झाल्यानंतर त्या पत्रावर विभागाच्या कार्यपद्धतीने कार्यवाही केली जाते, ज्याद्वारे एखाद्या जुन्या संचिकेत हे पत्र समाविष्ट होते किंवा एखाद्या नविन संचिकेची निर्मिती होते. जुन्या अस्तित्वात असलेल्या संचिकांचा क्रमांक कायम ठेवून त्या संचिकांवर यापुढील कार्यवाही नविन पद्धतीप्रमाणे करण्याची सोय या प्रणालीत आहे. या प्रकारात जुन्या संचिकेचा सीआर क्रमांक आणि त्याचे संदर्भ कायम ठेवण्यात येतात. नविन निर्माण होणाऱ्या सर्व संचिका पुर्णत: इलेक्ट्रॉनिक स्वरूपात तयार करण्यात येतात. 

पत्रावर कार्यवाही करतांना लिपिकास टिप्पणी मसुदा नोंदविता येतो तो मसुदा कच्चा मजकूर म्हणून तयार करता येतो त्यात दुरुस्ती करून अंतिम मसुदा तयार करता येतो. एकदा एखाद्या टिप्पणीचा अंतिम मसुदा तयार झाल्यानंतर त्यात करण्यात येणाऱ्या प्रत्येक बदलाची नोंद या प्रणालीत दिनांक आणि वेळ निहाय ठेवली जाते. त्याच पद्धतीने आवश्यक असल्यास या टिप्पणीसोबत इतर मसुदा आणि पत्राचा मसुदासुद्धा जोडण्यात येतो. 

टिप्पणी, मसुदा आणि पत्राचा नमुना या सहित ही संचिका वरिष्ठास सादर केली जाते, लिपीकाने केलेल्या कार्यवाही नुसार वरिष्ठांकडून त्या संचिकेवर अधिक शेरा आणि टिप्पणी लिहिल्या जातात आणि ती संचिका परत लिपिकाकडे किंवा वरिष्ठाकडे सादर होते. प्रत्येक टप्प्यावर संचिकेसोबत स्कॅन स्वरूपात जोडलेले कागदपत्र एका क्लिकच्या सहाय्याने संबंधितास पाहता येतात. तसेच प्रत्येक स्तरावर आवश्यक असल्यास अधिक कागदपत्रे स्कॅन स्वरूपात या संचिकेस जोडता येतात. 

प्रत्येक वापरकर्त्याची या प्रणालीत प्रवेश करतांना डिजीटल सिग्नेचर वापरून सत्यता पडताळणी करण्यात येते. त्यामुळे अनधिकृत वापरकर्त्यास प्रतिबंध होतो. प्रत्येक टिप्पणी पुढे पाठवतांना वेळ आणि दिनांक (टाईम स्टॅम्प) नोंदविला जातो. अधिकाऱ्याने इतर विभागास द्यावयाच्या पत्राचे प्रारूप मान्य केल्यास 'ई-ऑफीस' वापरणाऱ्या अन्य कोणत्याही कार्यालयास इलेक्ट्रॉनिक स्वरूपात पाठविता येते तथापि 'ई-ऑफीस' प्रणाली न वापरणाऱ्या कार्यालयांसाठी त्या पत्राचे प्रिंट काढण्याची व्यवस्था आहे. या प्रणालीतून तयार झालेल्या पत्रात 'डिजीटली साईन्ड' असा उल्लेख असल्यामुळे अधिकाऱ्याने परत स्वाक्षरी करावयाची आवश्यकता नाही.

राष्ट्रीय ग्रामीण आरोग्य अभियान (महाराष्ट्र राज्य) आयुक्त कार्यालयाने १/११/२०१२ पासून या प्रणालीची अंमलबजावणी सुरु केली असून १५/०७/२०१३ पर्यंत ५३६ ई-ऑफीस वापरकर्त्यांच्या सहाय्याने २२,४४८ संचिका बनविल्या आहेत तर ९८,७३२ पत्रांची नोंद घेऊन त्यांना पोचपावती देण्यात आली आहे. या विभागाचे मुंबई आणि पुणे स्थित कार्यालये ई-ऑफीसच्या माध्यमातून जोडली गेली असून या प्रणालीच्या संकेत स्थळाचा पत्ता http://nrhm.eoffice.gov.in असा आहे. 

देशातील पहिले पेपरलेस जिल्हाधिकारी कार्यालय होण्याचा मान सिंधुदुर्ग जिल्हाधिकारी कार्यालयाला मिळाला असून २४/१२/२०१२ पासून 'ई-ऑफीस' प्रणालीची अंमलबजावणी सुरु करून अवघ्या सात महिन्यात २५,००० संचिका बनविल्या आहेत. तर ७०,००० पत्रांची नोंद घेऊन त्यांना पोचपावती देण्यात आली आहे. जिल्हाधिकारी कार्यालयात विविध विभागांतर्फे हाताळण्यात येणाऱ्या सुमारे २३०० विषयांचे कार्य विवरण स्पष्ट करून त्यांची विभागवार आखणी करून संचिका प्रवासाचा आराखडा निश्चित करण्यात आला.

ई-ऑफीस च्या अंमलबजावणीमुळे सर्व संचिका आता शिपाई, लिपिक यांच्यामार्फत न जाता ती थेट संबंधित निर्णय घेणाऱ्या अधिकाऱ्याच्याच डेस्कटॉपवर धडकतात आणि संचिकांचा निपटारा संबंधीत अधिकाऱ्यास केवळ इंटरनेट व आपली डिजीटल सिग्नेचर घेऊन कुठेही बसून करता येतो. 'पेपरलेस ऑफीस' ही संकल्पना प्रत्यक्षात उतरली असून कार्यालयात आता 'कागदी घोडे नाचविण्या'सारखा वाक्प्रचार इतिहासजमा झालेला आहे. 

Source- महाराष्ट्र न्यूज.

Mar 12, 2014

प्रश्न मंजुषा- 3


1. चिली या दक्षिण अमेरिकी देशाचे नवनियुक्त राष्ट्राध्यक्ष कोन?

A. सोजर रोहेरो
B. सिमोन चाल्सकोफ्फ
C. मिशेल बेशेले
D. टिमो रोबर्टसन



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2. पतधोरण पद्धतीचा आढावा घेण्यासाठी RBI ने कोणाच्या अध्यक्षतेखाली समिती नेमली होती?

A. डॉ. रघुराम राजन
B. डॉ. उर्जीत पटेल
C. बिमल जालान
D. नचिकेत मोर



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3. नोकिया ने अलीकडेच बाजारात आणलेल्या android आधारित फोन चे नाव काय?

A. नोकिया लुमिया x
B. नोकिया x
C. नोकिया y
D. नोकिया Pure View



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4. भारताचे अमेरिकेतील राजदूत म्हणून अलीकडेच कोणाची नियुक्ती करण्यात आली आहे?

A. प्रथमेश रॉय
B. राजीव जोशी
C. सी. नारायणन
D. सुब्रामण्यम जयशंकर



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5. सलग 9 वेळा लोकसभेवर निवडून गेलेले महाराष्ट्रातील खासदार कोण?

A. माणिकराव गावित
B. शरद पवार
C.दत्ता मेघे
D. विलास मुत्तेमवार



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Mar 11, 2014

प्रश्न मंजुषा- 2

1. दुस‌र्‍या युवा ऑलिंपिक स्पर्धा 2014 मध्ये कोठे होणार आहेत ?

A. सिंगापूर
B. ब्राझील
C. चीन
D. कॅनडा



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2. महाराष्ट्र मानव विकास मिशनचे पहिले कार्याध्यक्ष कोण होते ?

A. के.बी.भोगे
B. नीला सत्यनारायण
C. सुधीर ठाकरे
D. चंद्रकांत दळवी



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3. कोणत्या शैक्षणिक आयोगात 3 री ते 6 वी ची पूर्व प्राथमिक शिक्षणाबद्दल तरतूद करण्यात आली होती?

A. सार्जंट आयोग
B. कोठारी आयोग
C. हॉरटॉग आयोग
D. वूड्स चा खलिता



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4. 20 वे 'नवोदित अखिल भारतीय मराठी साहित्य संमेलन - 2013' कोठे भरले होते?

A. चंद्रपूर
B. नागपूर
C. उस्मानाबाद
D. परभणी



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5. 87 वे अखिल भारतीय मराठी साहित्य संमेलन कोठे पार पडले?

A. सावंतवाडी
B. रामटेक
C. गोँदिया
D. सासवड



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प्रश्न मंजुषा- 1

1. महाराष्ट्रातील कोणत्या ठिकाणी 'हाय लॅटीट्यूड फिजीक्स लॅबोरेटी ' (High latitude cloud Physics Laboratory) विकसित केली जात आहे?

A. म्हैसमाळ
B. गाविलगड
C. महाबळेश्वर
D. तोरणमाळ




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2. 'सायली गोखले' ही खेळाडू कोणत्या क्रिडाप्रकाराशी संबंधित आहे ?

A. बुद्धीबळ
B. बॅडमिंटन
C. गोल्फ
D. लॉन टेनिस




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3. हॅार्नबिल फेस्टिवल' भारतातल्या कोणत्या राज्यात साजरा केला जातो ?

A. आसाम
B. नागालँड
C. गोवा
D. केरळ




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4. 'आंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस' कधी साजरा केला जातो?

A. 1 सप्टेंबर
B. 1 ऑक्टोबर
C. 1 नोव्हेंबर
D. 1 डिसेंबर




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5. खालीलपैकी कोणती एक संयुक्त राष्ट्रसंघटनेची अधिकृत भाषा नाही.

A. फ्रेंच
B. चिनी
C. जपानी
D. इंग्रजी




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Mar 2, 2014

औद्योगिक विकासात महाराष्ट्र सातत्याने अग्रेसर - मुख्यमंत्री



मुंबई : औद्योगिक विकासात महाराष्ट्र राज्य सातत्याने अग्रेसर राहीले असून गुंतवणुकदारांनी राज्याला कायम पसंती‍ दिली आहे. 2005 मध्ये जाहीर केलेल्या ओद्योगिक विशाल प्रकल्प धोरणास चांगला प्रतिसाद मिळाला असून 403 विशाल प्रकल्पांना मान्यता देण्यात आली आहे. या प्रकल्पातील आश्वासित गुंतवणूक 3,21,099 कोटी रु. असून 3.57 लाख व्यक्तींना रोजगार मिळणे अपेक्षित आहे. 114 प्रकल्पांमध्ये उत्पादन सुरु झाले असल्याचे मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यांनी आज येथे सांगितले. 

राज्य शासन व औद्योगिक विकास महामंडळ यांच्यातर्फे आज हॉटेल ट्रायडंट येथे मुख्यमंत्री व उद्योग राज्यमंत्री सचिन अहिर यांच्या उपस्थितीत 32 कंपन्यांसमवेत सामंज्यस्य करारावर स्वाक्षऱ्या करण्यात आल्या, त्यावेळी मुख्यमंत्री बोलत होते.

मुख्यमंत्र्यांच्या हस्ते यावेळी "मैत्री" पोर्टलचे उद्घाटन करण्यात आले व " मॅग्नेटिक महाराष्ट्र" या चित्रफितीचे सादरीकरण करण्यात आले. 

विशाल प्रकल्प धोरणांतर्गत या 32 कंपन्यांना विशाल प्रकल्पाचा दर्जा व प्रोत्साहने देऊ केली आहेत, असे सांगून मुख्यमंत्री पुढे म्हणाले, एम.आय.डी.सी ने विकसित केलेल्या " मैत्री " पोर्टलमुळे या उद्योजकांना सर्व प्रकारच्या परवानग्या, दाखले, पर्यावरणविषयक बाबी या संदर्भात सर्व माहिती उपलब्ध होणार असून प्रत्येक प्रकल्पासाठी एका समन्वय अधिकाऱ्याची नियुक्ती केल्यामुळे या उद्योजकांच्या सर्व अडचणी सुलभतेने दूर होतील व प्रकल्प वेगाने मार्गी लागतील, असा विश्वास मुख्यमंत्र्यांनी यावेळी व्यक्त केला. 

मुख्यमंत्री पुढे म्हणाले, पश्चिम घाटातील औद्योगिक विकासासाठी माधव गाडगीळ समिती नियुक्त करण्यात आली होती. या समितीने केलेल्या शिफारसींसंदर्भात औद्येागिक विकासात पर्यावरणविषयक अडथळे दूर करण्यासाठी कस्तुरीरंगन समितीने अभ्यास केला असून त्यांचा अहवाल लवकरच अपेक्षित आहे. नवीन औद्योगिक धोरणात उद्योजकांना अनेक सवलती देण्यात आल्या आहेत. मागास भागात औद्योगिक विकास साधण्याचे राज्य शासनाचे ध्येय असून रिअल इस्टेट संदर्भात एक समिती, औद्योगिक विकासासाठी दुसरी समिती आणि टी.सी. बेंजामिन यांच्या अध्यक्षतेखाली तिसरी समिती नेमण्यात आली असून औद्येागिक प्रकल्पांना पर्यावरण संदर्भात हिरवा कंदिल दाखविण्यासाठी ही समिती काम करणार आहे. जागतिक मंदीच्या पार्श्वभूमीवरही राज्याच्या औद्योगिक विकासावर कोणताही परिणाम झालेला नसून गेल्या 10 वर्षातील विकास दर आणि राष्ट्रीय सकल उत्पादन यामध्ये वाढ झाल्याचे मुख्यमंत्र्यांनी यावेळी सांगितले. नागपूर येथील कृषी प्रदर्शनाला अतिशय उत्तम प्रतिसाद मिळाला. सुमारे 7 लाख शेतकऱ्यांनी या प्रदर्शनास भेट दिली. कोरडवाहू शेतीसाठी करण्यात येणाऱ्या ठिबक सिंचनासारख्या विविध उपाय योजनांची माहिती मुख्यमंत्र्यांनी यावेळी दिली. नुकत्याच झालेल्या गारपीटीमुळे बाधित झालेल्या क्षेत्रासाठी राज्य शासन तातडीने मदत जाहीर करणार असल्याचेही त्यांनी यावेळी सांगितले. 

उद्योग राज्यमंत्री सचिन अहिर यांनी यावेळी बोलतांना म्हणाले, राज्याच्या पायाभूत सुविधांमध्ये मोठया प्रमाणावर वाढ झाली असून महाराष्ट्र औद्येागिक विकास महामंडळ 8000 हेक्टर जमीन औद्योगिक प्रकल्पांसाठी ताब्यात घेणार आहे. त्यापैकी 5000 हेक्टर जमीन मंडळाने संपादित केली आहे. उद्योजकांना देण्यात येणाऱ्या विशेष सवलतींची आणि मैत्री पोर्टलद्वारे उद्योजकांना 31 प्रकारच्या सेवा पुरविण्यात येणार असल्याची माहिती त्यांनी यावेळी दिली. 

राज्याचे मुख्य सचिव जे. एस. सहारिया यावेळी म्हणाले, नवीन औद्येागिक धोरणामुळे राज्यात गुंतवणूकदारांसाठी अनुकुल वातावरण निर्माण झाले आहे. गुंतवणुकदारांनी राज्यात गुंतवणूक करण्यास जो विश्वास दाखविला आहे. त्याबद्दल त्यांनी उद्योजकांचे आभार मानले. 

उद्योग विभागाचे प्रधान सचिव अपूर्व चंद्र यावेळी म्हणाले, उद्योग सुरु करतांना लागणाऱ्या विविध परवानग्यांसंदर्भात आवश्यक असणाऱ्या कागदपत्रांची संख्या अत्यंत अल्प करण्यात आल्यामुळे उद्योजकांना सुलभतेने आवश्यक ते दाखले प्राप्त होतात. यामुळे राज्यात औद्योगिक प्रकल्पांच्या संख्येत निश्चितच वाढ होईल. 
औद्योगिक विकास महामंडळाचे मुख्य कार्यकारी अधिकारी भूषण गगराणी यांनी यावेळी आभार प्रदर्शन केले. महामंडळाचे सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. पी. अनबल्गन, माजी मुख्य सचिव जयंतकुमार बाँठिया आणि उद्योग जगतातील अनेक मान्यवर यावेळी उपस्थित होते. 

Source- माहिती महासंचनालय.

मराठी ला अभिजात भाषेचा दर्जा मिळवून देण्यासाठी प्रयत्न करावेत - प्रा. वामन केंद्रे



नवी दिल्ली : ग्रामीण भागात विविध माध्यमांतून होत असलेल्या मराठी भाषेच्या भाषिक व्यवहारातून आणि नाटक, साहित्य आदींतून मराठी भाषा समृध्द होत आहे. तदवत प्रमाण भाषेचा आग्रह व तत्सम भाषिक वाद दूर सारून सर्वांनी मराठी भाषेला अभिजात भाषेचा दर्जा मिळवून देण्यासाठी प्रयत्न करावेत असे आवाहन राष्ट्रीय नाटय विद्यालयाचे संचालक प्रा. वामन केंद्रे यांनी गुरुवारी केले. 

महाराष्ट्र परिचय केंद्र व महाराष्ट्र सदनाच्यावतीने येथील महाराष्ट्र सदनात आयोजित “मराठी भाषा गौरव दिनाच्या” कार्यक्रमात ते बोलत होते. वरिष्ठ पत्रकार धर्मानंद कामत, महाराष्ट्र सदनाचे अपर निवासी आयुक्त प्रदीप कुमार, महाराष्ट्र परिचय केंद्राचे उपसंचालक दयानंद कांबळे यावेळी व्यासपिठावर उपस्थित होते.

श्री. केंद्रे म्हणाले की, मराठीच्या अनेक पोट भाषा महाराष्ट्राच्या ग्रामीण भागात बोलल्या जातात. या ग्रामीण मराठी भाषेत संगीत आहे, तीला एक लय आहे, नाद आहे. या भाषेचे हे विविध चेहरे आणि वर्हा डी, घाटी, बानकोटी आदी भाषेत होणारी नाटय निर्मीती आणि साहित्य यामुळे मराठी भाषा समृध्द होत असल्याचे ते म्हणाले. नोकरी, शिक्षण आदींच्या माध्यमातून महाराष्ट्रा बाहेर देशातील विविध भागात आणि परदेशात वास्तव्य करीत असलेल्या मराठी भाषीकांनीही आपआपल्यापरीने मराठी भाषेच्या विकासासाठी प्रयत्न करावे असे आवाहनही त्यांनी उपस्थितांना केले. 

श्री. धर्मानंद कामत यांनी आपल्या भाषणात सूप्रसिध्द साहित्यिक वि.वा. शिरवाडकारांच्या साहित्यावर प्रकाश टाकला. मराठी भाषीक लोक नोकरी व्यवसायासाठी राज्याबाहेर असले तरी मराठी भाषेच्या सूत्राने त्यांची नाड या भाषेशी जुडून असल्याचे मत त्यांनी आपले अनुभव कथन करीत सांगितले. पत्रकरीतेत शब्दांची टांकसाळ बाळगणारे पत्रकार आणि वाचकांकडून त्यांना मिळणारी दाद यावरही त्यांनी प्रकाश टाकला. नुकताच ओरिया भाषेला मिळालेला अभिजा भाषेचा उल्लेख करत मराठी भाषेलाही अभिजात भाषेचा दर्जा मिळून देण्याकरिता सर्वंकश प्रयत्न होण्याच्या भावनाही त्यांनी यावेळी बोलवून दाखवल्या. 

यावेळी विविध प्रसार माध्यमांत कार्यरत असणारे मराठी पत्रकार, विविध कार्यालयात कार्यरत अधिकारी, महाराष्ट्र सदन आणि महाराष्ट्र परिचय केंद्राचे अधिकारी कर्मचारी मोठया संख्येने उपस्थित होते. कार्यक्रमाचे प्रास्तावीक उपसंचालक दयानंद कांबळे यांनी केले. जनसंपर्क अधिकारी प्रवीण टाके यांनी सूत्रसंचालन केले तर उपसंपादक रितेश भुयार यांनी आभार प्रदर्शन केले.